स्माल फाइनेंस बैंक की श्रेणी के Equitas Small Finance Bank के शेयरों में आज तेजी है. (image: pixabay)

300 रुपये ज्यादा देकर शेयर वापस खरीदेगी ये कंपनी, 6 महीने में दे चुकी है 42% का रिटर्न

Hinduja Global Solutions Buyback: कंपनी ने सोमवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में शेयर बायबैक की जानकारी दी है. बोर्ड से अधिकतम 1,020 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक की मंजूरी दी है.

हिंदुजा ग्रुप की Hinduja Global Solutions ने शेयर बायबैक का ऐलान किया है. कंपनी को बोर्ड से 1,020 करोड़ रुपये के 60 लाख शेयरों के बायबैक की मंजूरी मिली है. Hinduja Global ने सोमवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है. हम आपको इस शेयर बायबैक की पूरी जानकारी दे रहे हैं ताकि अगर आप चाहें तो इस बायबैक का फायदा उठा सकते हैं. आइए जानते हैं Hinduja Global के इस शेयर बायबैक प्रोग्राम के बारे में.

रेगुलेटरी फाइलिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, बायबैक के लिए अधिकतम प्राइस 1,700 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. सोमवार को ये शेयर 1402.75 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ था. ऐसे में सोमवार को क्लोजिंग के हिसाब से देखें तो कंपनी की इस बायबैक के जरिए निवेशकों को अधिकतम 298 रुपये प्रति शेयर का फायदा मिल सकता है. कंपनी ने बताया है कि बायबैक पर अधिकतम 1,020 करोड़ रुपये खर्च केरगी.

आज बाजार खुलने के बाद इस शेयर में करीब 3% की गिरावट देखने को मिली है. आज ये शेयर 1399.90 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खुला है. पिछले 6 महीने में इस शेयर ने निवेशकों को करीब 42% का रिटर्न दिया है. वहीं, पिछले 5 साल में इस कंपनी का रिटर्न करीब 201% रहा है. हालांकि, इस साल अब तक करीब 17% की गिरावट भी देखने को मिली है.

1,020 करोड़ रुपये में ब्रोकरेज खर्च, फीस, टर्नओवर चार्ज, टैक्स, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स समेत दूसरे खर्च शामिल नही हैं. कंपनी ने बताया है कि स्टाम्प ड्यूटी, एडवाइजर फीस, फाइलिंग फीस, प्रिटिंग और डिस्पैच खर्च भी 1,020 करोड़ में शामिल नहीं होगा. अधिकतम बायबैक पर कंपनी ने 60 लाख शेयरों को वापस खरीदने की जानकारी दी है. कंपनी ने बताया कि अधिकतम शेयर बायबैक 30 सितंबर 2022 तक कुल पेड अप कैपिटल का 14.36% होगा. 17 दिसंबर 2022 तक ये पेड अप कैपिटल का करीब 11.43% हिस्सा होगा.

बायबैक प्रोग्राम में मौजूदा रेगलेटरी नियमों के अनुपालन के लिए बोर्ड ने 'बायबैक कमेटी' नाम से एक कमेटी भी बनाई है. फाइलिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, बोर्ड ने नरेंद्र सिंह को प्रस्तावित बायबैक प्रोग्राम के लिए कंपनी सेक्रेटरी, कम्प्लॉयंस ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया गया है.

शेयर बायबैक में कंपनी खुद की रकम खर्च कर बाजार से अपने ही शेयर वापस खरीदती ब्रोकरेज हाउस की फीस जरूर देखें है. इसे आसान शब्दों में समझें तो कंपनी मानती है कि बाजार में शेयर के भाव काफी कम हैं. शेयर बायबैक से कंपनी का इक्विटी कैपिटल कम हो जाता है. बाजार से वापस खरीदे गए शेयर खारिज हो जाते हैं. बायबैक किए गए शेयरों को दोबारा जारी नहीं किया जा सकता है. इक्विटी कैपिटल कम होने से कंपनी की शेयर आमदनी यानी EPS बढ़ जाती है. बायबैक से शेयर को बेहतर P/E मिलता है.

ये स्माल फाइनेंस बैंकिंग स्टॉक बन सकता है ‘रिटर्न मशीन’, 50 रुपये के करीब है भाव, आगे 50% आ सकती है तेजी

Equitas Small Finance Bank के बोर्ड ने इक्विटास होल्डिंग्स और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के बीच Amalgamation की एक योजना को मंजूरी दे दी है.

ये स्माल फाइनेंस बैंकिंग स्टॉक बन सकता है ‘रिटर्न मशीन’, 50 रुपये के करीब है भाव, आगे 50% आ सकती है तेजी

स्माल फाइनेंस बैंक की श्रेणी के Equitas Small Finance Bank के शेयरों में आज तेजी है. (image: pixabay)

Equitas Small Finance Bank Stock Price: स्माल फाइनेंस बैंक की श्रेणी में आने वाले Equitas Small Finance Bank के शेयरों में आज तेजी देखने को मिल रही है. आज यह बैंकिंग स्टॉक 2.5 फीसदी से ज्यादा मजबूत होकर 58 रुपये के भाव पर पहुंच गया. कल यानी सोमवार को यह शेयर 53 रुपये पर बंद हुआ था. असल में बैंक के बोर्ड ने इक्विटास होल्डिंग्स और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के बीच Amalgamation की एक योजना को मंजूरी दे दी है. जिसके बाद शेयर को लेकर सेंटीमेंट बेहतर हुए हैं. ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल भी इस डेवलपमेंट को लंबी अवधि के लिए पॉजिटिव मान रहे हैं. ब्रोकरेज का कहना है कि बैंक की ऐसट क्वालिटी को लेकर कुछ कंसर्न हैं, लेकिन एक बार मर्जर पूरा होने के बाद बैंक यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेगा.

बैंक के लिए क्या है पॉजिटिव

ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल का कहना है कि ओवरआल लायबिलिटी के फ्रंट पर बैंक बेहतर कर रहा है. बैंक ने माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFIs) से दूर अपने बेस में डाइवर्सिफिकेशन किया है. हालांकि, कोविड-19 महामारी के चलते बेंक की एसेट क्वालिटी को लेकर कुछ चिंता जरूर बनी है, इसलिए प्रेरित झटके के कारण इसकी परिसंपत्ति गुणवत्ता कमजोर हुई है, इसलिए Equitas Small Finance Bank को पोर्टफोलियो की क्वालिटी/मिक्स में सुधार के साथ-साथ बेहतर प्रोविजनिंग बफर बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है. ब्रोकरेज का मानना ​​है कि एक बार मर्जर पूरा हो जाने के बाद, बैंक एक यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए ब्रोकरेज हाउस की फीस जरूर देखें ब्रोकरेज हाउस की फीस जरूर देखें आवेदन करेगा, जो बैंक के लिए लॉन्ग टर्म पॉजिटिव ट्रिगर है. ब्रोकरेज हाउस ने शेयर में 80 रुपये के टारगेट के साथ निवेश की सलाह दी है. करंट प्राइस 53 रुपये के लिहाज से इसमें 50 फीसदी रिटर्न मिल सकता है.

हाल ही में QIP से जुटाई थी पूंजी

Equitas Small Finance Bank ने हाल ही में QIP के माध्यम से पूंजी जुटाई थी. बैंक ने पब्लिक शेयर होल्डिंग 25 फीसदी तक बढ़ाने की SEBI की रिक्वायरमेंट पूरी करने और फिर amalgamation के लिए अप्रूवल पाने के लिए QIP के जरिए फंड जुटाए थे. पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म कम्प्लाएंस के बाद SEBI के अप्रूवल से के बाद ब्रोकरेज का मानना है कि सेबी की मंजूरी तेजी से आ सकती है, जब तक कि वेल्युएशन मेथॉडोलॉजी पर इसका कोई आब्जर्वेशन न हो. सेबी की मंजूरी के बाद, NCLT सहित अन्य रेगुलेटरी अप्रूवल में 3 से 6 महीने लग सकते हैं. इसके बाद, Equitas Small Finance Bank एक यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है.

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(Disclaimer: स्टॉक में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई है. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार नहीं हैं. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की राय लें.)

अमेरिकी शेयर बाजार में कैसे करें निवेश, क्या ये सही समय है?

एक वित्तीय वर्ष में 2,50,000 डॉलर यानी करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये भारतीय सीमा के बाहर निवेश कर सकते हैं.

अमेरिकी शेयर बाजार में कैसे करें निवेश, क्या ये सही समय है?

जबरदस्त रिटर्न के लिए अच्छी और मुनाफा बनाने वाली कंपनी की तलाश हर निवेशक को होती है. हो सकता है ऐसे में आपका मन टेस्ला, अमेजन या नेटफ्लिक्स जैसी कंपनी पर आया हो जो भारतीय बाजार नहीं बल्कि US के बाजार में निवेश के लिए मौजूद है. आइए ऐसे में समझते हैं एक भारतीय निवेशक के लिए अमेरिकी बाजार में निवेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं को-

अमेरिका में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज के ऐलान के बाद S&P 500 इंडेक्स अप्रैल में पहली बार 4,000 का स्तर पार कर गया.

कितना बड़ा है US स्टॉक मार्केट?

अमेरिकी शेयर बाजार दुनिया का सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट है. US के दो बड़े स्टॉक एक्सचेंज, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक में अमेजन, टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, इत्यादि विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों के शेयर लिस्टेड हैं. अमेरिकी बाजार से जुड़े विभिन्न इंडेक्स जैसे S&P 500 इंडेक्स, डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्सों का इस्तेमाल निवेशकों की दृष्टि से US और विश्व की अर्थव्यस्था को समझने के लिए किया जाता है. साथ ही दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी इनकी दिशा का बड़ा असर होता है. दूसरे देशों की कंपनियां भी विभिन्न वजहों से अपनी लिस्टिंग US बाजार में करवाती है.

निवेश के क्या हो सकते हैं फायदे?

निवेशक हमेशा रिस्क को कम करने के लिए अपने पोर्टफोलियो में विभिन्न सेक्टर और अलग अलग तरह के स्टॉक्स रखना चाहते हैं. इस दृष्टि से किसी भी बाहरी बाजार में निवेश नए विकल्पों को खोल देता है. US बाजार में कई दूसरे देशों की कंपनियों भी खुद को लिस्ट करवाती है.

बीते वर्षों में अमेरिकी बाजार में भारतीय बाजार की तुलना में कम वोलैटिलिटी देखी गई है. काफी बार रिटर्न के मामले में भी US के बाजार का प्रदर्शन भारतीय बाजार से बेहतर रहा है. रुपये के डॉलर की तुलना में कमजोर होने का भी निवेशकों को फायदा मिल सकता है.

स्टार्टअप हब होने के कारण US में अच्छी क्षमता वाली कंपनियों में शुरुआत में निवेश का मौका होता है. इसी तरह भारत या अन्य बाजारों में कई बड़ी कंपनियों की सब्सिडियरी लिस्ट होती है जबकि US बाजार में सीधे निवेश से ज्यादातर ऐसी कंपनियों में आसानी से निवेश कर सकते हैं.

कैसे कर सकते हैं निवेश शुरु?

US बाजार में निवेश के दो रास्ते हैं.

पहला तरीका सीधे निवेश का है. इसमें निवेशक भारतीय बाजार की तरह ही ब्रोकर के साथ रजिस्ट्रेशन कर स्टॉक्स में खरीद बिक्री कर सकता है. आजकल भारतीय ब्रोकरेज कंपनियां भी अमेरिकी ब्रोकरेज हाउस के साथ करार कर निवेशकों को आसान निवेश की सुविधा देती हैं. निवेशक जरूरी पैन कार्ड, घर के पते को सत्यापित करने वाले ID के साथ सीधे अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी के साथ भी बाजार में व्यापार के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.

दूसरा तरीका म्यूचुअल फंड के रास्ते निवेश ब्रोकरेज हाउस की फीस जरूर देखें का हो सकता है. भारत में अनेकों म्यूचुअल फंड US बाजार आधारित फंड चलाते हैं. ऐसे फंड या तो सीधा अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड शेयरों में निवेश करते हैं या ऐसे बाजारों से जुड़े दूसरे म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. इस प्रक्रिया में किसी अलग तरह के रजिस्ट्रेशन और बाजार के गहरी समझ की जरूरत नहीं है.

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ITR filing: कल तक आईटीआर नहीं भरा, तो लगेगी पेनल्‍टी, 7 साल तक की हो सकती है जेल, जानिए नियम

टैक्सपेयर्स की जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप तय तारीख यानी कल तक आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं तो आपको ₹ 5,000 लेट फीस का भुगतान करना होगा। इतना ही नहीं आपको 7 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।

ITR filing: कल तक आईटीआर नहीं भरा, तो लगेगी पेनल्‍टी, 7 साल तक की हो सकती है जेल, जानिए नियम

Income Tax Return Filing: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तय तारीख 31 जुलाई 2022 है। यानी टैक्सपेयर्स के पास अपना ITR दाखिल करने के लिए बस कुछ ही घंटे हैं। आयकर विभाग शुरू से इनकम ग्रुप वाले लोगों से तय तारीख के भीतर अपना आईटी रिटर्न भरने और विलंब शुल्क या जुर्माना से बचने की सलाह देता रहा है। ब्रोकरेज हाउस की फीस जरूर देखें टैक्सपेयर्स की जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप तय तारीख यानी कल तक आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं तो आपको ₹ 5,000 लेट फीस का भुगतान करना होगा। इतना ही नहीं आपको 6 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।

क्या कहते हैं टैक्स एक्सपर्ट?
मुंबई के टैक्स और निवेश एक्‍सपर्ट बलवंत जैन के अनुसार, अगर कोई इनकम ग्रुप वाला व्यक्ति 31 जुलाई 2022 की तय तारीख तक आईटीआर दाखिल करने से चूक जाता है, तब भी वह अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकता है। अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2022 तक 5000 रुपये से अधिक आय वाले करदाता को आईटीआर फाइलिंग के समय 5,000 रुपए का लेट फीस देना होगा, जबकि 5 लाख से कम आय की स्थिति में लेट फीस 1,000 रुपए देना होगा।

आपको जेल भी हो सकती है
जैन ने आगे कहा कि भारत सरकार के पास इनकम ग्रुप वाले ऐसे व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने की शक्ति होती है जो तय समय 31 दिसंबर 2022 तक AY2022-23 के लिए आईटीआर फाइल नहीं करते हैं।

कब हो सकती है जेल
बलवंत जैन ने कहा, "मौजूदा आयकर नियमों में कम से नम 6 महीने की कैद और अधिकतम 7 साल की कैद की सजा का प्रावधान है। ऐसा नहीं है कि विभाग आईटीआर दाखिल करने में विफलता के हर मामले में आपके खिलाफ मुकदमा चला सकता है। आय विभाग केवल तभी मुकदमा चलाया जा सकता है, जब टैक्स की राशि 10,000 रुपये से अधिक हो।"

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